Feb 10, 2012

जिंदगी तो ब्राह्मण जिया करते है ,
दिगजो को पछाड़ कर के राज किया करते है ,
कौन रखता है किसी के सर पे ताज ,
हम ब्राहमण तो अपना राज तिलक ,
स्वयं अपने रक्त से किया करते है ..!!!

Proud to be brahmin !!

जय श्री राम कृष्ण परशुराम ॐ

Feb 9, 2012

जैसे गाय का बछङा हज़ारोँ गायोँ के बीच अपनी मां को ढूँढ ही लेता है और उसी के पास जाता है,ऐसे ही मनुष्य के कर्म भी उसे ढूँढ ही लेते हैँ।कर्ता अपने कर्म का फल भोगे बिना कैसे रह सकता है" 

चाणक्य
"Just as a calf recognises his own mother amongst thousands of cows and goes to her only,so is the Karm of a person,how can doer escape his karm?"
Chaanakya
ॐॐ

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